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कोरबा-मोतियाबिंद के मामले में आम धारणा यही है कि बिना आपरेशन के मोतियाबिंद ठीक नहीं हो सकती लेकिन ऊर्जा नगर कोरबा में मोतियाबिंद से पीड़ित एक ऑटो चालक की आंखों की रोशनी लौटी है वह भी बिना ऑपरेशन और चीर फाड़ के आर्युवेद की अक्षितपर्ण पद्धति से और पीड़ित पूरी तरह स्वस्थ हुआ और उसकी आंखों की रोशनी भी वापस आई ।

इस तस्वीर में नजर आ रहे है उनका नाम है मुन्ना साहू जो पेशे से एक ऑटो चालक है, और अपने परिवार का भरण पोषण करते है।कुछ दिन पहले उन्हें आंखों में मोतियाबिंद की परेशानी हुई साथ दिखने में बहुत दिक्कत होने लगी,नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराई तो मोतियाबिंद की पुष्टि हुई तथा उन्हें आपरेशन कराने की सलाह दी गई।ऐसे में आपरेशन का खर्च उठाना  मुश्किल था तब वे आर्युवेद की अक्षितपर्ण पद्धति की शरण ली,इस चिकित्सा पद्धति से कुछ ही दिनों में मोतियाबिंद की समस्या पूरी तरह ठीक हो गई और उनकी  आंखों की रोशनी वापस आई।

शहर के आर्युवेद डा नागेन्द्र शर्मा  ने बताया कि मोतियाबिंद के इलाज के लिए आर्युवैदिक पंचकर्म के अंतर्गत अक्षितपर्ण प्रक्रिया  का प्रयोग किया गया।यह एक प्राचीन एवं प्रभावी  पंचकर्म  चिकित्सा है। डॉक्टर शर्मा ने बताया कि यह प्रक्रिया आंखों को पोषण देती है,रक्त संचार में सुधार करती है और कई नेत्र रोगों जैसे मोतियाबिंद,चश्मे का नंबर घटने बढ़ने,दूर दृष्टि दोष में अत्यंत लाभकारी है।इसके पहले भी कोरबा पतंजलि चिकित्सालय में कई बीमारियों से परेशान चल रहे लोगों ने अपना उपचार कराया और बेहतर समाधान हासिल किया।

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